Lal kitab | lal kitab in hindi Pdf download

Download lal kitab in hindi pdf   
लाल किताब ई—बुक करें डाउनलोड

 ebook का नाम— लाल किताब (lal kitab)

 e book लेखक का नाम— पंडित रूप चंद जोशी

 e book अनुवादक का नाम— योगराज प्रभाकर 

 प्रकाशक का नाम— रवि प्रभाकर, राहुल कम्प्यूटर्ज, पटियाला

लाल किताब का इतिहास बहुत कम ही लोग जानते होंगे। लाल किताब न तो अरुण संहिता है और न ही रावण संहिता। लाल किताब प्राचीन अरब की ज्यो‍तिष विद्या भी नहीं है।दरअसल, भारत के बंटवारे के पूर्व लाहौर में रूपचंद जोशी नाम के एक सैन्य अधिकारी रहते थे। ब्रिटिश सेना में वे असिस्टेंट अकाउंट ऑफिसर थे। वे पंजाबी के साथ ही अंग्रेजी, उर्दू व फारसी के भी जानकार थे। रूपचंद जोशी का जन्म 18 जनवरी 1898 को पंजाब के फरवाला गांव में हुआ था, जहां उनका पुश्तैनी मकान है। यह गांव नूरमहल तहसील जिला जालंधर में आता है। उनका एक बेटा है जिसका नाम पं. सोमदत्त जोशी है। बंटवारे के बाद जोशीजी लाहौर से चंडीगढ़ में शिफ्ट हो गए थे और 1954 में वे रिटायर्ड हो गए।

एक बार लाहौर में खुदाई का काम चल रहा था, जहां से तांबे की पट्टिकाएं मिलीं। उन पट्टिकाओं पर अरबी या फारसी में कुछ लिखा हुआ था। इन पट्टिकाओं को लेकर लोग पं. रूपचंद जोशी के पास गए। उन्होंने अरबी, फारसी में लिखी उस पांडुलिपि को पढ़ा तो पता चला कि उसमें ज्योतिष संबंधी बहुत ही गहन-गंभीर बातें लिखी हुई हैं। उन्होंने उन दस्तावेजों को पढ़ने और समझने के लिए अपने पास रख लिया।उन्होंने उन पट्टिकाओं को पढ़ने के बाद उसे अपनी लाल कवर वाली कॉपी में लाल पेन से उर्दू में लिखा। चूंकि वे आर्मी अफसर थे इसलिए उन्होंने ये किताब अपने नाम से न निकालते हुए ‘गिरधारीलाल’ के नाम से निकाली। चूंकि वे मिलिट्री ऑफिसर थे और गवर्नमेंट सर्वेंट ऐसे काम नहीं कर सकते थे इसलिए उन्होंने ‘गिरधारीलाल’ के नाम से यह किताब छपवाई। ये ‘गिरधारीलाल’ संभवत: उनके सौतेले भाई थे।

लाल किताब के अब तक मूलत: 5 खंड या कहें कि संस्करण प्रकाशित हुए हैं।

Decision 1939 में हस्तरेखा और सामुद्रिक विज्ञान पर आधारित पहली पुस्तक’लाल किताब के फरमान’ के नाम से प्रकाशित हुई। यह किताब 383 पेजों की है।दूसरी 1940 में ज्योतिष विज्ञान पर आधारित’लाल किताब के अरमान’ नाम से प्रकाशित हुई। यह किताब 280 पेजों की है। 1941 में लाल किताब का तीसरा ग्रंथ प्रस्तुत किया गया जिसे प्यार से’गुटका’ नाम दिया गया।1942 में लाल किताब का तीसरा ग्रंथ’लाल किताब तरमीमशुदा’ नाम से प्रकाशित हुआ, जो कि 428 पेजों का है।अंत में चौथी और आखिरी किताब इल्म-ए-सामुद्रिक की दुनिया पर लाल किताब 1952 में प्रकाशित हुई। यह किताब 1173 पेजों की है।*कहते हैं कि उनके पुत्र पं. सोमदत्त जोशी ने ‘रेहन्नुमा-ए-लाल किताब’ नाम से एक किताब निकाली थी।

तो यह था लाल किताब के इतिहास का संक्षिप्त परिचय

उल्लेखनीय है कि उस काल में पंजाब में सरकारी कामकाज और लेखन में ऊर्दू और फारसी का ही ज्यादा प्रचलन था। इसीलिए वे पट्टिकाएं भी उसी भाषा में खुदवाई गई थीं। कहते हैं कि यह पट्टिकाएं मुगलकाल में एक व्यक्ति ने बनवाकर जमीन में दफन करवा दी थी। मुगलकाल में ज्योतिष विद्या को बचाने के लिए ऐसा कार्य किया गया था। उन पट्टिकाओं में ज्योतिष की दक्षिण भारत में प्रचलित सामुद्रिक शास्त्र और हस्तरेखा विद्या के साथ ही पंजाब और हिमाचल में प्रचलित उपायों के बारे में उल्लेख मिलता है।

लाल किताब : दोषों को शांत करने के अचूक टोटके

हाथ रेखा को समुद्र गिनते, नजूमे फलक का काम हो

इल्म क्याफा ज्योतिष मिलते, लालकिताब का नाम हो

कुछ लोग लाल किताब को टोनो और टोटको की किताब समझते हैं, तो कुछ लोग इस को तंत्र की किताब मानते हैं। सच्चाई ऐसी नहीं है, लाल किताब से हम किसी का भी कोई नुक्सान नहीं बल्कि केवल भलाई ही कर सकते है। इसमें धर्माचरण और सदाचरण पर जोर दिया है। लाल किताब में बहुत जगह सदाचार, कानून का पालन करना, विधवा सेवा, नेत्रहीन की सेवा और कन्या सेवा के लिए कहा गया है। वास्तव में लालकिताब जीना सीखने की किताब है।लाल किताब के द्वारा पिछले जन्म और अगले जन्म का हाल बखूबी बताया जा सकता है ।

किसी भी जातक के जन्म की तिथि या समय के अभाव में उस व्यक्ति के चेहरे, हाथो की रेखा और शरीर के अंगो जैसे कान,होंठ, आंखे इत्यादि देख कर भी बहुत कुछ बताया जा सकता है ।लाल किताब में पूर्व जन्म में किये गए पाप कर्मो को धोने के भी उपाय बताये गए हैं। उदहारण के तौर पर यदि जन्मकुंडली के दूसरे या सातवें घर में यदि शुक्र के शत्रु ग्रह ( राहू , सूर्य , चंद्रमा) बैठे हैं, तो उस जातक को वैवाहिक जीवन में असंतुष्टि हो सकती है, जिसका एक कारण ये भी हो सकता है कि उस व्यक्ति ने पूर्व जन्म में किसी गर्भवती स्त्री या गाय को स्वार्थवश सताया होगा। उपाय के तौर पर लालकिताब बताती है कि उस व्यक्ति को १०० स्वस्थ गायो को एक ही दिन में हरा चारा खिलाना चाहिए और किसी भी स्त्री या गाय को सताना नहीं चाहिए।लाल किताब में वास्तु ज्ञान का भी वर्णन किया गया है।

यहाँ तक कि मकान की हालत देख कर उसमें रहने वालो के बारे में बताया जा सकता है ।लालकिताब के अनुसार पांच कोण वाला मकान नहीं बनाना चाहिए। इस तरह का भवन उसमें रहने वाले निवासियों के लिए हानिकारक ही होता है ।लाल किताब की सबसे बड़ी विशेषता ग्रहों के दुष्प्रभावों से बचने के लिए जातक को उपायों का सहारा लेने का संदेश देना है। ये उपाय इतने सरल हैं कि कोई भी जातक इनका सुविधापूर्वक सहारा लेकर अपना कल्याण कर सकता है जैसे, काला कुत्ता पालना, कौओं को खिलाना, क्वाँरी कन्याओं से आशीर्वाद लेना, किसी वृक्ष विशेष को जलार्पण करना, कुछ अन्न या सिक्के पानी में बहाना, चोटी रखना, सिर ढँक कर रखना इत्यादि । इन उपायों के सहारे जातक कीमती ग्रह रत्नों (मूंगा, मोती, पुखराज, नीलम, हीरा आदि) में हजारों रुपयों का खर्च करने के बजाय इन उपायों के सहारे कम खर्च द्वारा ग्रहों के दुष्प्रभावों से अपनी रक्षा कर सकता है। लेकिन, लालकिताब में कहीं भी ऐसा दावा नहीं किया गया है की ज्योतिष द्वारा या किसी भी उपाय द्वारा हम मृत्यु को जीत सकते है बल्कि इसके उपायों द्वारा हम बुरे ग्रहों के प्रभाव को कम कर सकते हैं।

लालकिताब में साफ़ साफ़ लिखा है —

लालकिताब है ज्योतिष निराली, जो सोई किस्मत जगा देती है

फरमान पक्का दे के आखिरी, दो लफ्जों से ज़हमत हटा देती है

‘लाल किताब’ ज्योतिर्विद्या की एक स्वतन्त्र और मौलिक सिद्धान्तों पर आधारित एक अनोखी पुस्तक है। इसकी अपनी कुछ निजी विशेषताएँ हैं, जो अन्य सैद्धान्तिक अथवा प्रायोगिक फलित ज्योतिष-ग्रन्थों से हटकर हैं। ज्योतिष के इस महाग्रन्थ को पंडित रूपचंद जोशी द्वारा वर्ष १९३९ से १९५२ के दौरान पांच भागों में लिखी गई थी। उन्होंने लाल किताब में हस्त रेखाओं, सामुद्रिक शास्त्र, मकान की हालत और जन्मकुंडली के ग्रहों को मिला कर भविष्य कथन और ग्रहों के दोष निवारण के लिए उपाय बताये हैं। यह पुस्तक मूलतः उर्दू में लिखी गयी थी।

हाथ रेखा को समुद्र गिनते, नजूमे फलक का काम हो

इल्म क्याफा ज्योतिष मिलते, लालकिताब का नाम हो

कुछ लोग लाल किताब को टोनो और टोटको की किताब समझते हैं, तो कुछ लोग इस को तंत्र की किताब मानते हैं। सच्चाई ऐसी नहीं है, लाल किताब से हम किसी का भी कोई नुक्सान नहीं बल्कि केवल भलाई ही कर सकते है। इसमें धर्माचरण और सदाचरण पर जोर दिया है। लाल किताब में बहुत जगह सदाचार, कानून का पालन करना, विधवा सेवा, नेत्रहीन की सेवा और कन्या सेवा के लिए कहा गया है। वास्तव में लालकिताब जीना सीखने की किताब है।

लाल किताब के द्वारा पिछले जन्म और अगले जन्म का हाल बखूबी बताया जा सकता है । किसी भी जातक के जन्म की तिथि या समय के अभाव में उस व्यक्ति के चेहरे, हाथो की रेखा और शरीर के अंगो जैसे कान,होंठ, आंखे इत्यादि देख कर भी बहुत कुछ बताया जा सकता है ।

लाल किताब में पूर्व जन्म में किये गए पाप कर्मो को धोने के भी उपाय बताये गए हैं। उदहारण के तौर पर यदि जन्मकुंडली के दूसरे या सातवें घर में यदि शुक्र के शत्रु ग्रह ( राहू , सूर्य , चंद्रमा) बैठे हैं, तो उस जातक को वैवाहिक जीवन में असंतुष्टि हो सकती है, जिसका एक कारण ये भी हो सकता है कि उस व्यक्ति ने पूर्व जन्म में किसी गर्भवती स्त्री या गाय को स्वार्थवश सताया होगा। उपाय के तौर पर लालकिताब बताती है कि उस व्यक्ति को १०० स्वस्थ गायो को एक ही दिन में हरा चारा खिलाना चाहिए और किसी भी स्त्री या गाय को सताना नहीं चाहिए।

लाल किताब में वास्तु ज्ञान का भी वर्णन किया गया है। यहाँ तक कि मकान की हालत देख कर उसमें रहने वालो के बारे में बताया जा सकता है ।लालकिताब के अनुसार पांच कोण वाला मकान नहीं बनाना चाहिए। इस तरह का भवन उसमें रहने वाले निवासियों के लिए हानिकारक ही होता है ।

लाल किताब की सबसे बड़ी विशेषता ग्रहों के दुष्प्रभावों से बचने के लिए जातक को उपायों का सहारा लेने का संदेश देना है। ये उपाय इतने सरल हैं कि कोई भी जातक इनका सुविधापूर्वक सहारा लेकर अपना कल्याण कर सकता है जैसे, काला कुत्ता पालना, कौओं को खिलाना, क्वाँरी कन्याओं से आशीर्वाद लेना, किसी वृक्ष विशेष को जलार्पण करना, कुछ अन्न या सिक्के पानी में बहाना, चोटी रखना, सिर ढँक कर रखना इत्यादि । इन उपायों के सहारे जातक कीमती ग्रह रत्नों (मूंगा, मोती, पुखराज, नीलम, हीरा आदि) में हजारों रुपयों का खर्च करने के बजाय इन उपायों के सहारे कम खर्च द्वारा ग्रहों के दुष्प्रभावों से अपनी रक्षा कर सकता है। लेकिन, लालकिताब में कहीं  भी ऐसा दावा नहीं किया गया है की ज्योतिष द्वारा या किसी भी उपाय द्वारा हम मृत्यु को जीत सकते है बल्कि इसके उपायों द्वारा हम बुरे ग्रहों के प्रभाव को कम कर सकते हैं। लालकिताब में साफ़ साफ़ लिखा है –

बिमारी का तो बगैर दवा इलाज है, मौत का कोई इलाज नहीं

ज्योतिष दुनियावी हिसाब किताब है , कोई दावा-ऐ -खुदाई नहीं है

यहां लाल किताब के कुछ उपाय हैं, जिन्हें कोई भी व्यक्ति अपनी भलाई के लिए कर सकता है –

अपने भोजन में से कुछ हिस्सा गाय, कुत्ते और कौवे को देना, विधवाओं की सेवा करना और उनका आशीर्वाद लेना, पक्षियों को दाना ड़ालना, सूर्य की अराधना करना, बिजली के मीटर में गड़बड़ न करना और बिल पूरा भरना

पंडित रूप चाँद जोशी ने पुस्तक के आखिर में आशीर्वाद स्वरुप फ़रमाया है की :

खुश रहो आबाद दुनिया माल ओ-जार बढते रहो

मदद मालिक अपनी देगा, नेकी खुद करते रहो

Tags:

We will be happy to hear your thoughts

Leave a reply

free books
Logo
Enable registration in settings - general